कर्तव्य -कर्तव्य ऐसा आदर्श मित्र है जो कभी धोखा नहीं दे सकता और धैर्य एक ऐसा कड़वा पौधा है
कर्तव्य
कर्तव्य ऐसा आदर्श मित्र है जो कभी धोखा नहीं दे सकता और धैर्य एक ऐसा
कड़वा पौधा है जिस पर फल हमेशा मीठे आते हैं,किसी मनुष्य की बुराई को
बताना आम लोगों की पहचान है पर बुराई मेंअच्छाई ढूंढना खास लोगों की पहचान
है,
हम अपनी सीमा में
रहते हुएऔर ईश्वर को साक्षी मानकर जब पूरी लगन,निष्ठा ईमानदारीऔर समर्पण के
साथ अपना कर्म करते हैं दायित्व निभाते हैं
तो वह समाज और व्यवस्था के लिए
हमारा सबसे बड़ा योगदान होता है तब न किसी के साथ हमारी कोई प्रतिस्पर्धा
होती है न ईर्ष्या होती है न शत्रुता तब हम किसी की प्रगति में बाधा नहीं
बनते और न कोई हमारी प्रगति में बाधक होता है,
इस तरह पूरा समाज एकसाथ प्रगति
करता हैऔर व्यवस्था में नैतिकता तथा शुचिता का प्रादुर्भाव होता है,अगर हम
मनुष्य इतनी सी बात समझ लें औरआत्मसात कर लें तो न कहीं कोई लड़ाई झगड़ा
होगा न कोईअपना पराया होगा न किसी केअधिकार काअतिक्रमण होगा क्योंकि जब हम
सब ईश्वर का ही काम कर रहे होंगे तब सब सुख और शांति के साथअपने अपने कर्म
करते हुए मोक्ष को प्राप्त होंगे!*
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